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NH-130 बना मवेशियों के लिए मौत का रास्ता! तानाखार में एक ही जगह 8-10 मवेशियों के शव, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

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कटघोरा-अंबिकापुर मार्ग पर आए दिन सड़क हादसों में मवेशियों की मौत, जिम्मेदारों के निर्देशों के बावजूद हालात जस के तस

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कटघोरा/तानाखार। कटघोरा से अंबिकापुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130 पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी अब वाहन चालकों के साथ-साथ बेजुबान पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है। आए दिन सड़क पर गाय-बैल दुर्घटना का शिकार होकर मृत अवस्था में पड़े दिखाई दे रहे हैं।सोमवार को कटघोरा के समीप तानाखार में एक ही स्थान पर करीब 8 से 10 मवेशी सड़क दुर्घटना में मृत पड़े दिखाई दिए। एक साथ इतनी संख्या में मवेशियों की मौत ने सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया जाता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवारा मवेशियों को सड़क पर बैठने से रोकने तथा विशेषकर शाम और रात के समय उनकी निगरानी को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद NH-130 पर हालात सुधरने के बजाय लगातार गंभीर होते नजर आ रहे हैं।आखिर जिम्मेदारी किसकी?राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क पर बैठे या घूमते मवेशी कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। कई बार वाहन चालक अचानक सामने आए मवेशियों को बचाने के प्रयास में दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन को आवारा पशुओं को सड़क से हटाने और उनकी देखरेख के निर्देश हैं, तो फिर बड़ी संख्या में मवेशी सड़क पर कैसे पहुंच रहे हैं? तानाखार में एक ही जगह 8-10 मवेशियों की मौत की घटना प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि NH-130 पर नियमित निगरानी बढ़ाई जाए, सड़क पर घूमने वाले आवारा मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और पशु मालिकों की जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही सड़क किनारे मृत पड़े मवेशियों के शवों को तत्काल हटाने की व्यवस्था की जाए, ताकि संक्रमण और नए हादसों का खतरा न रहे।ग्रामीणों का सीधा सवाल है—“आखिर प्रशासन कब नींद से जागेगा? क्या कई और मवेशियों की जान जाने के बाद ही जिम्मेदारों की आंख खुलेगी?”NH-130 पर तानाखार की यह तस्वीर केवल मवेशियों की मौत नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था के सामने खड़ा एक गंभीर सवाल है।

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